हमारा बजट 2019: बेदम मानसून से परेशान किसान को सरकार से राहत की उम्मीद

जांच

अनिलसिंह।जबदेशकी55प्रतिशतखेतीमानसूनकेभरोसेहोतोकिसानआसमानहीनहीं,सरकारकीतरफभीबड़ीउम्मीदसेदेखताहै।इसबारअभीतकमानसूनकीबारिशऔसतसेकाफीकमरहीहै।लिहाजासरकारसेकिसानोंकीउम्मीदेंकुछज्यादाहीबढ़गईहैं।वैसेभीपांचसालकदमतालकरनेकेबादपहलेसेज्यादाप्रचंडबहुमतसेदोबारासत्तामेंआईसरकारसेकिसानहीनहीं,सारादेशबेहदठोसकामोंकीअपेक्षाकररहाहै।कृषिकेलिएबीतेपांचसालोंमेंबहुतेरेवादे-इरादेजताएजाचुकेहैं।इसलिएइसबारमसलासिर्फइतनाभरनहींहैकिकिसानोंकोफसलकीसमग्रलागतकाडेढ़गुनाएमएसपी(न्यूनतमसमर्थनमूल्य)मिलजाए,उनकीआयअगलेतीनसालमेंदोगुनीकरदीजाए,50-100गांवोंकाक्लस्टरबनाकरवहांएग्रो-प्रोसेसिंगप्लांटलगादिएजाएंयाउनकेकर्जमाफकरदिएजाएं।सवालयहहैकिदेशकेकरोड़ोंकिसानोंकेलिएजोखेतीघाटेकासौदाबनगईहै,उसेमुनाफेकाधंधाकैसेबनायाजासकताहै।

किसानोंकोकितनीमिलेगीराहत?संसदमेंबातउठीहैकिअबभीअपनेयहांहरसाल40-50हज़ारकरोड़रुपयेकीफलवसब्जियांप्रोसेसिंगकेअभावमेंबर्बादहोजातीहैं।प्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीकाकहनाहैकिवेकॉरपोरेटक्षेत्रसेकृषिमेंनिवेशकरनेकोकहेंगे।इसबीचफरवरीकेअंतरिमबजटमेंजिसपीएम-किसानयोजनाकेतहतपांचएकड़तककीजोतवाले12करोड़लघुवसीमांतकिसानोंकोहरसाल6000रुपयेदेनेकीघोषणाकीगईहै,वहअबसभी14.5करोड़किसानोंतकबढ़ादीगईहै।ऊपरसेनईसरकारनेपहलीहीकैबिनेटबैठकमेंलघुवसीमांतकिसानोंको60सालकाहोतेहीप्रतिमाह3000रुपएपेंशनदेनेकीयोजनापारितकरदी।दावाहैकिप्रधानमंत्रीकिसानपेंशनयोजनाकेतहतपहलेतीनसालोंमेंकमसेकमपांचकरोड़लघुवसीमांतकिसानोंकोकवरकियाजाएगा।पांचजुलाईकोआरहेआमबजटमेंयहसभीघोषणाएंबाअदबामुलाहिजादोहराईजाएंगी।वित्तमंत्रीनिर्मलासीतारमणअपनेबजटकोगरीबोंवकिसानोंकाबजटबताएंगी।बीतेवित्तवर्ष2018-19मेंकिसानोंको11.68लाखकरोड़रुपयेकाफसलऋणदियागयातोइसवित्तवर्ष2019-20मेंइसे12-14लाखकरोड़रुपयेकियाजासकताहै।वैसे,सरकारनेबजटसेपहलेअच्छाकामकियाकिगांव-गिरांवसेजुड़ेतीनमंत्रालयों-कृषिवकिसानकल्याण,ग्रामीणविकासऔरपंचायतीराजकोमिलाकरएकमंत्रीकेअधीनकरदिया।इससेफैसलेलेनेऔरलागूकरनेमेंआसानीहोजाएगी।लेकिनमसलाक्याहै?

चारमुद्देहैंखास फसलोंकीउत्पादकतावपैदावारकैसेबढ़े,उसकीमार्केटिंगव्यवस्थापुख्ताकैसेहो,उनकालाभकारीमूल्यकैसेमिलेऔरकृषिमेंपूंजीनिवेशकहांसेआए।अगरकॉरपोरेटक्षेत्रकृषिमेंपूंजीलगाताहैतोक्याकिसानोंकीस्थितिखनिजोंसेसंपन्नइलाकोंकेआदिवासियोंजैसीनहींहोजाएगी?क्याकिसानोंकाधनपूंजीनहींहोता?क्याकृषिकोकॉरपोरेटक्षेत्रकेहवालेकरनाजरूरीहै,उसीतरहजैसेनोटबंदीसेएमएसएमईक्षेत्रकोऔपचारिकक्षेत्रमेंलानेकेनामपरबड़ीपूंजीकेहवालेकरदियागया?

किसानोंकारखाजाएगाख्याल?देशके82.75प्रतिशतलघुवसीमांतकिसानोंकीअलग-अलगजोतोंकोसहकारितासेबड़ाबनायाजासकताहै।उनकेफार्मरप्रोड्यूसरसंगठन(एफपीओ)बनाएजासकतेहैं।उनकेखेतकॉन्ट्रैक्टफार्मिंगकेलिएकॉरपोरेटक्षेत्रकोभीदिएजासकतेहैं।तीनोंहीप्रयोगदेशमेंचलरहेहैं।उनकेअनुभवसेवित्तमंत्रीकोइसबारकेबजटमेंकोईसाफखाकापेशकरनाचाहिए।उन्हेंयहभीसाफकरनाहोगाकिअमेरिकाजिसतरहअपनेकृषिवडेयरीउत्पादोंकोभारतमेंबेचनेकादबावबनारहाहै,उससेवेकैसेलड़ेंगी।अनाजोंवकृषिउत्पादोंकेआयात-निर्यातपरभीसाफनीतिकीघोषणाकरनीहोगी।यहभीबतानापड़ेगाकिपीएम-किसानयोजनामें14.5करोड़किसानोंकोतोहरसाल6000रुपयेमिलजाएंगे,लेकिन14.4करोड़सेज्यादाभूमिहीनखेतिहरमजदूरोंकाक्याहोगा?

असलमें,किसानअपनेस्तरपरजितनाहोसकताहै,वहकररहाहै।बहुतेरेछोटेकिसानगेहूं-धानछोड़पपीतेवकेलेकीखेतीकरनेलगेहैं।अबसरकारकीबारीहै।उसेकिसानोंकीबातसुननीपड़ेगी।मगर,यादरखनाहोगाकिकिसानपेड़जैसाअसहायनहींहैकिकोईभीउसेकाटकरफर्नीचरयाभट्ठेमेंझोंकनेकीलकड़ीकीतरहइस्तेमालकरले।रास्तेनिकालनाऔरउनपरचलनाउसेआताहै।बस,उसेअपनेपरोक्षकरोंकेएवजमेंसरकारकानीतिगतसहयोगवसहकारमिलजाएतोवहअपनाकल्याणखुदकरलेगा।

(लेखकअर्थकाम.कॉममेंसंपादकहै)