कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में पक्षकार बनने को बीकेयू (एल) की न्यायालय में याचिका

जांच

नयीदिल्ली,24दिसंबर(भाषा)कृषिसुधारोंसेसंबंधिततीनविवादास्पदकृषिकानूनोंकीसंवैधानिकवैधताकोचुनौतीदेनेवालीयाचिकाओंमेंपक्षकारबननेकेलियेभारतीयकिसानयूनियन(लोकशक्ति)नेउच्चतमन्यायालयमेंअर्जीदायरकीहै।इनकानूनोंकेविरोधमेंकिसानोंकेतमामसंगठनोंनेदिल्लीकीसीमाओंकीघेराबंदीकररखीहै।भारतीयकिसानयूनियन(लोकशक्ति)नेलंबितमामलेमेंहीपक्षकारबनानेकाअनुरोधकरतेहुयेअपनेआवेदनमेंदावाकियाहैकिनयेकृषिकानूनकार्पोरेटजगतकेहितोंकोबढ़ावादेनेवालेहैंऔरयेकिसानोंकेहितमेंनहींहैं।अधिवक्ताएपीसिंहकेमाध्यमसेदायरइसआवेदनमेंआरोपलगायागयाहैकियेकानूनअसंवैधानिकऔरकिसानविरोधीहैंक्योंकिकिसानोंकोउनकीउपजकासहीमूल्यदिलानेकेमकसदसेकृषिउपजविपणनसमितिकीप्रणालीनयेकानूनोंपरअमलहोनेकेबादखत्महोजायेगी।आवेदनमेंकहागयाहै,‘‘इनकानूनोंकोलेकरकिसानोंमेंयहआशंकापनपरहीहैकिइनसेकृषिविपणनपरकार्पोरेटजगतकाकब्जाहोजायेगाऔरवेकिसानोंकीपैदावारकीकीमतेंमनमर्जीसेकमज्यादाकरेंगे।’’प्रधानन्यायाधीशएसएबोबडेकीअध्यक्षतावालीपीठने17दिसंबरकोइसमामलेकीसुनवाईकेदौरानकहाथाकिकिसानोंकोबगैरकिसीबाधाकेअपनाआन्दोलनजारीरखनेदेनाचाहिएऔरन्यायालयशांतिपूर्णतरीकेसेविरोधप्रदर्शनकरनेकेमौलिकअधिकारमेंहस्तक्षेपनहींकरेगा।न्यायालयनेयाचिकाकर्ताकोकिसानयूनियनोंकोइसमेंपक्षकारबनानेकीछूटप्रदानकीथी।इनकृषिकानूनोंकीसंवैधानिकवैधताकोराष्ट्रीयजनतादलकेराज्यसभासदस्यमनोजझा,तमिलनाडुसेद्रमुककेराज्यसभासदस्यतिरुचीशिवाऔरछत्तीसगढ़किसानकांग्रेसकेराकेशवैष्णवसहितकईलोगोंनेचुनौतीदेरखीहैं।न्यायालयने12अक्टूबरकोइनयाचिकाओंपरकेन्द्रकोनोटिसजारीकियाथा।संसदकेमानसूनसत्रमेंतीनविधेयक-कृषक(सशक्तिकरणएवंसंरक्षण)कीमतआश्वासनऔरकृषिसेवाकरारविधेयक,2020,कृषकउत्पादव्यापारएवंवाणिज्य(संवर्धनएवंसरलीकरण)विधेयक2020औरआवश्यकवस्तु(संशोधन)विधेयक2020पारितकियेथे।येतीनोंविधेयकराष्ट्रपतिरामनाथकोविंदकीमंजूरीमिलनेकेबाद27सितंबरकोप्रभावीहुए।इसबीच,इनकानूनोंकेविरोधमेंकिसानोंनेदिल्लीकीसीमओंपरघेराबंदीकरकेआवागमनअवरूद्धकरदिया।दिल्लीकीसीमापरयातायातसुगमबनानेऔरकिसानोंकोवहांसेहटानेकेलियेकानूनकेछात्रऋषभशर्मा,अधिवक्तारीपककंसलऔरजीएसमणिआदिनेन्यायालयमेंयाचिकादायरकीहैं।याचिकामेंराष्ट्रीयराजधानीकीसीमाओंपरप्रदर्शनकररहेकिसानोंकोहटानेकाप्राधिकारियोंकोनिर्देशदेनेकाअनुरोधकरतेहुयेकहाहैकिकिसानोंनेदिल्ली-एनसीआरकीसीमाएंअवरूद्धकररखीहैं,जिसकीवजहसेआनेजानेवालोंकोबहुतपरेशानीहोरहीहैऔरइतनेबड़ेजमावड़ेकीवजहसेकोविड-19केमामलोंमेंवृद्धिकाभीखतराउत्पन्नहोरहाहै।न्यायालयने17दिसंबरकोइसमामलेकीसुनवाईकेदौरानकहाथाकिकिसानोंकेप्रदर्शनको‘‘बिनाकिसीअवरोध’’केजारीरखनेकीअनुमतिहोनीचाहिएऔरवहइसमें‘‘दखल’’नहींदेगाक्योंकिविरोधकाअधिकारएकमौलिकअधिकारहै।शीर्षअदालतने16दिसंबरकोइसमामलेमेंआठकिसानयूनियनोंकोप्रतिवादीबनानेकीअनुमतिदीथी।लेकिनअबऋषभशर्मानेएकआवेदनदायरकर40सेज्यादाकिसानयूनियनोंकोइसमेंपक्षकारबनायाहै।इनकिसानयूनियनोंमेंबीकेयू-सिधूपुर,बीकेयू-राजेवाल,बीकेयू-लखोवाल,बीकेयू-डकौंडा,बीकेयू-दोआबा,जम्बूरीकिसानसभाऔरकुलहिन्दकिसानफेडरेशनभीशामिलहैं।